छत्तीसगढ़

दिवंगत श्रमिक राजेन्द्र सिदार की पत्नी ललिता सिदार को दिया गया 25 हजार का चेक

Shantanu Roy
13 Dec 2025 11:47 PM IST
दिवंगत श्रमिक राजेन्द्र सिदार की पत्नी ललिता सिदार को दिया गया 25 हजार का चेक
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Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। बरमकेला विकासखंड के ग्राम पंचायत जामपाली निवासी दिवंगत मनरेगा श्रमिक राजेन्द्र सिदार की कार्यस्थल पर अचानक हुई मौत के बाद उनके परिवार को राहत पहुंचाने के लिए कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने तत्काल कदम उठाया। कलेक्टर के दिशा-निर्देश और जिला पंचायत सीईओ इंद्रजीत बर्मन के मार्गदर्शन में राजेन्द्र सिदार की पत्नी ललिता सिदार को जनपद पंचायत बरमकेला में 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। इस अवसर पर सीईओ अजय पटेल, सुधा कश्यप, मनरेगा पीओ, सरपंच दामिनी नरेश साहू और रोजगार सहायक उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार, राजेन्द्र सिदार उम्र 45 वर्ष, दिनांक 12 दिसंबर 2025 को मनरेगा कार्य स्थल पर काम कर रहे थे। अचानक बेहोश होने पर उन्हें सीएचसी बरमकेला लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक को मृत्यु का कारण बताया गया है। मृतक का परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहा था और परिवार के आर्थिक हालात को देखते हुए कलेक्टर ने ललिता सिदार को तत्काल सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया।
कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने कहा कि मनरेगा श्रमिकों के कार्यस्थल पर किसी भी अप्रिय घटना पर प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करता है। मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए तुरंत राहत राशि उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह कदम केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि परिवार के प्रति प्रशासन की संवेदनशीलता का प्रतीक भी है। सीईओ अजय पटेल ने बताया कि इस प्रक्रिया में सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए चेक प्रदान किया गया। वहीं मनरेगा पीओ और अन्य अधिकारी भी इस दौरान परिवार से मिले और उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। सरपंच दामिनी नरेश साहू ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए ऐसे कदम बेहद आवश्यक हैं। ललिता सिदार ने कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद यह राशि उनके बच्चों और परिवार के रोज़मर्रा के जीवन को संभालने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी तरह की आकस्मिक आर्थिक सहायता योजनाएं ग्रामीण श्रमिकों के लिए राहत का कार्य करती हैं। कलेक्टर डॉ संजय कन्नौजे ने भी कहा कि भविष्य में इस तरह के हादसों में श्रमिकों के परिवारों के लिए और भी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारीयों ने कहा कि ग्रामीण विकास और मनरेगा कार्यों में शामिल श्रमिकों के लिए प्रशासन संवेदनशील है और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता सुनिश्चित की जाती है। इस पहल से अन्य ग्रामीण परिवारों के लिए भी सकारात्मक संदेश गया है कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
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